मैं तुच्छ सा बालक अग्यानी हूँ,
कुछ अच्छी चीजें सीखने को आया हूँ,
चरणों में अपने स्थान दो गुरुवर,
तुच्छ से बना दो महान मुझको,
कुछ ज्ञान हमें भी दो गुरुवर.....।।
गुरु ही दीपक है गुरु ही रोशनी है,
खुद जलकर अंधेरों में रोशनी फैलाया है,
खुद को वही रखकर हमको आगे बढ़ाया है,
तब जाकर देश में ज्ञान का दीया जल पाया है....।।
नतमस्तक कर मैं उनका आभार व्यक्त करती हूँ,
ऐसे गुरुवर को मैं बारम्बार प्रणाम करती हूँ...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







