अधूरे ख़्वाब अक्सर रातों में रोते हैं,
जागती आँखों से चुपचाप कुछ कहते हैं।
जो पूरे न हो पाए, वह हार नहीं होते,
वह आने वाले कल के इशारे होते हैं।
कुछ ख़्वाब समय से पहले टूट गए होंगे,
कुछ अपनों की चुप्पी में ही छूट गए होंगे।
पर जो सपना दिल में अब भी साँस लेता है,
वह हर गिरती उम्मीद को फिर थाम लेता है।
अधूरे ख़्वाब बोझ नहीं—जिम्मेदारी हैं,
वह आत्मा की गहराई की सच्ची पहरेदारी हैं।
जो चुभते हैं, वही राह दिखाते हैं अक्सर,
जो जलाते हैं भीतर, वही दीप बनते हैं सफ़र।
हर अधूरापन कहता है—“ठहर मत जाना”,
हार की परिभाषा में ख़ुद को मत पहचानना।
जो टूटा है आज, वही कल का आधार बने,
अधूरा स्वप्न ही अक्सर सबसे साकार बने।
इसलिए अधूरे ख़्वाबों से डरना नहीं कभी,
वह थामते हैं हाथ जब साथ हो न कोई भी।
क्योंकि जो पूरा हो गया, वह कहानी था,
जो अधूरा रह गया—वही ज़िंदगी की निशानी था।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







