सूना सूना घर लगता है,
अब तो घर में डर लगता है।
धनवानों को छूट मिली तो,
पानी पर भी कर लगता है।
मिहनत के बल पर ही यारों,
सपनों को भी पर लगता है।
सुख-दुख में जो साथ निभाता,
देव बराबर नर लगता है।
काली है कोयल पर उसकी
मीठा कितना स्वर लगता है।
सीख मिली ये मात-पिता से
पर धन यारों खर लगता है।
मिहनत की सूख रोटी भी,
माल पुआ से तर लगता है।
साथ न हो जब राही मन का,
कितना बोर सफ़र लगता है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







