दिल अपने भी खिलेंगे अब के बहार में
बैठे हुए हैं कब से इसी इन्तजार में
जाने कहां गया वो फूलों का शामियाना
भंवरे जो गा रहे थे किसके जुहार में
ये बुलबुलें उदास क्यों बैठी हैं शाख पर
दिल टूट गया कैसे हुस्न ए बहार में
खुशबू चुराएगी थोड़ी हवा जुर्म कुछ नहीं
बन्द कोई इसको करे मर्तबान में
अब बाजार है नया नया दास बोलियाँ लगा
सच मिल रहा देख नकद में उधार मेंII