आँखें (पाबंद नज़्म)
बस देखने को तुझको तरसती रहीं आँखें
कल याद तुझे करके बरसती रहीं आँखें
यादों का धुआं बाकी रहा आँख में मेरे
ता उम्र उसी में ही सुलगती रहीं आँखें
कल ख़्वाब मुझे आया क्या तेरा मेरे हमदम
खुशबू से ही तेरी ये महकती रहीं आँखें
यादों का उठा शोला सा दिल में भी हमारे
और फिर उन्हीं शोलों में दहकती रहीं आँखें
ग़म इश्क़ का है और ग़म-ए-दुनिया भी बहुत है
और बीच में उन्हीं के झुलसती रहीं आँखें
थीं वो झुकी पलकें कभी तेरी उठी पलकें
हर पल नया फिर दांव बदलती रहीं आँखें।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







