छोटी-छोटी बातों पर जो ग़ुस्सा कर जाऊँ मैं,
रूठूँ अगर पल में, तो मना पाओगे क्या तुम?
ज़िद्दी हूँ बहुत, हर बात मनवाऊँ अगर मैं,
हर ज़िद को मेरी, मुस्कुरा कर निभाओगे क्या तुम?
बच्चों-सी नादानी, बचकानी-सी हरकतें,
थामोगे मेरा हाथ, संभाल पाओगे क्या तुम?
रोती हूँ बहुत मैं, संभालते-संभालते मुझको,
मेरे दर्द में ख़ुद को भी रुला जाओगे क्या तुम?
तबियत जब बिगड़ जाए, खुद से भी लड़ जाऊँ,
ख़ुद से पहले मेरा ही ख्याल रख पाओगे क्या तुम?
अंदर से जो टूटी हूँ, बिखरी-सी पड़ी हूँ,
टूटे हुए हिस्सों को फिर से जोड़ पाओगे क्या तुम?
सबके सामने हँसती हूँ, दर्द छुपाए रहती हूँ,
मेरी ख़ामोशी का मतलब पहचान पाओगे क्या तुम?
जब कहूँ मुझे कोई नहीं चाहिए इस पल,
उसी वक़्त सबसे पहले आ जाओगे क्या तुम…
Gitanjali gavel ✨


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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