(बाल कविता)
वही बजाता सुख की बीन
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लहसुन की आँड़ी थी एक ।
लेकिन उसमें कली अनेक ।।
एक कली सब्जी में डाली ।
दो कलियाँ कच्ची ही खा ली ।।
सात कली की चटनी पीसी ।
बहुत चटपटी तीखी तीखी ।।
देशी घी ने किया कमाल ।
नौ कलियों से छौंकी दाल ।।
एक कली थी पूरी दागी ।
और उसे चुहिया ले भागी ।।
बीस कली का बना अचार ।
देख टपकती सबकी लार ।।
आँड़ी में कितनी थीं डलियाँ ।
अगर बचीं हैं अब दस कलियाँ ।।
मुन्नी बोली फिर उनचास ।
सीता बोली नहीं पचास ।।
हाँ पचास का था ये खेल ।
मुन्नी हो गई इसमें फेल ।।
सीता करती है अभ्यास ।
हुई गणित में फौरन पास ।।
जो भी पढ़ता होकर लीन ।
वही बजाता सुख की बीन ।।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल'


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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