बाबा रामदेवजी को लोक देवता माना जाता है यह श्री कृष्ण के अवतार भी हैं इन्होंने जब जन्म लिया तो ( मेघवाल )समाज के अंदर जन्म लिया यह मेघवाल समाज के सहायक थे उनकी पत्नी का नाम नेतल था जो कि श्री राधा की अवतार थी ।
इनका जन्म ऐसे हुआ था की एक आदमी था नाम था अजमल जो कहते थे भगवान होते ही नहीं है उन्होंने गुस्से में अगर लड्डू को श्री कृष्ण जी के मूर्तियां पर मारा था इन्होंने कहा अगर ईश्वर है तो सामने आकर दिखाओ यह गुस्से में आकर नदी में चलांग लगा दी
यह जो देखे हैं उनकी निगाहें टिकती रहती हैं
यह जो देखा ना सके नदी में जाके
श्री कृष्ण के सिर पर चोट थी
अजमल बोले यह कैसे हुआ प्रभु
श्री कृष्णा बोलत है मेरा है एक भगत उसको आया गुस्सा तुम मेरी प्रतिभा पर लड्डू फेंक दिया ।
अजमल रोने लगे जोरसे प्रभु मुझे भूल हुई
मुझे माफ करदेना श्री कृष्ण कहते हैं मैं बाबा रामदेव जी रामसापीर के रूप में तुम्हारे घर में अवतार लूंगा
रामदेव जी को हिंदू के साथ साथ मुस्लिम भी मानते है
ये सच्ची घटना पर आधारित हैं
एक बार 5 पीर ( मुस्लिम) रामदेव जी से मिलने गये पीर ने कहा अल्लाह ही भगवान है रामदेव तो नहीं है
रामदेव जी से मुलाकात होती है रामदेव जी कहते है आप हमारे अतिथि है भोजन करूँ मुस्लिम बोले हमारा पात्र बर्तन मका में है रामदेव जी ने चमत्कार से बर्तन आया भोजन करवाया और पीर बोले हम पीर आप पिरो के पीर रामसापीर हो


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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