इंसानी दिमाग साइंसदान बनकर साइंस को जन्म दिया
कुछ साइंसदान ने दुनियां को रौशन किया और सजाया
बेशुमार चीज़ों की ख़ोज और इजाद किया किरदार वाले
सदियों से दुनियां चमक रही थी मेल मिलाप था इन्सान में
बदकिरदार सोच मोबाइल इजाद से अमन विनाश कर दिया
मेरी सोच से साइंसदान बनना कमाल नहीं इंसानियत भंग करके
जबकि डायनामाइट आविष्कार से अहसास हुआ था अल्फ्रेड नोबेल को
अहसास होजाना किसी को दिल में थोड़ी सी इंसानियत ज़िंदा है मेरी तहकीक से
हमने आज़ समझा बेहतर है डायनामाइट मोबाइल और इंटरनेट आविष्कार से
ख़ुदको चमकना दूसरे को बुझाकर इंसान नहीं ये शैतान का काम होता है
शैतान अलग रूप नहीं बद आचरण दिल में बसता जो सच्ची आंखों में झलकता है
मेरा दिल न वज़ीर न मुफ्ती न पंडित न पादरी सिर्फ़ अच्छा आचरण पसंद करता है
वसी अहमद क़ादरी । वसी अहमद अंसारी ।
मुफक्किर ए कायनात । मुकक्किर ए मखलूकात
दरवेश । लेखक । पोशीदा शायर
एक फरवरी बीस सौ छब्बीस


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







