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खुद को सफेद कपड़े सा बनाने वालों,
मैं कहता हूं.. कुछ दाग लगे रहने दो..
दर्द को रोक खुद को मजबूत कहने वालों,
मैं कहता हूं.. अश्रुओं को बहने दो..
खुद को ऊंची छतों पर ले जाने वालों,
मैं कहता हूं.. कुछ लोगों के साथ हो लो..
भविष्य में जीवन सजाने वालों,
मैं कहता हूं.. बिखरे में ही जी लो ..
खुद को सीधा बनाने वालों,
मैं कहता हूं.. थोड़ा टेढ़ा ही बने रहो..
सदा समस्याओं को पढ़ने वालों,
मैं कहता हूं.. कुछ कविताएं, कल्पनाएं पढ़ लो..
चार दिन के जीवन में, सही गलत अपने हिसाब से कहते हैं लोग,
मैं कहता हूं... दो निकल चुके, अब दो खुलकर जी लो..
✍🏻 अनुकूल शर्मा ✨


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







