Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

"भारत भाग्य विधाता: दिव्य चेतना महागाथा"

"भारत भाग्य विधाता: दिव्य चेतना महागाथा"

​तुंग हिमालय के मस्तक पर, किरणों का नव श्रृंगार जहाँ,
शंखनाद से मुखरित होता, सुबह-सवेरे संसार जहाँ!
यह केवल भूभाग नहीं, यह महाशक्ति का मंदिर है,
इसके पावन श्वास-श्वास में, बसता आदि-दिगंबर है!

​कण-कण में अंकुरित यहाँ पर, उपनिषदों का दर्शन है,
इस माटी का तिलक लगाना, साक्षात् प्रभु का अर्चन है।
शिरडी वाले साईं की करुणा, और महाकाल का तेज यहाँ,
जगन्नाथ की रथयात्रा का, उमड़ रहा रस-मेघ यहाँ!

दक्षिण में रामेश्वरम पावन, उत्तर में बद्री-विशाल धाम,
पूरब में जगन्नाथ विराजे, पश्चिम में द्वारिकाधीश श्याम।
नवरात्रि के पावन व्रत में, गूँजे चंडी की अमर कला,
विघ्नविनाशक गणपति का, उत्सव मन भावन यहाँ फला!

नीति-शास्त्र के महाज्ञाता, विदुर की पावन वाणी है,
भरतमुनि के नाट्य-शास्त्र की, यह धरती कल्याणी है।
पाणिनि के व्याकरण-सूत्र से, शब्द-ब्रह्म का रूप मिला,
धन्वंतरि के सुश्रुत-संहिता से, जीवन का नव रूप खिला!

संगीत-शिरोमणि तानसेन के, रागों की झंकार यहाँ,
शिल्पकला के जीवंत रूप, खजुराहो के मंदिर की दीवार यहाँ।
अजंता-एलोरा की गुफाएँ, सदियों का वैभव कहती हैं,
कला-संस्कृति की अमर नदियाँ, इस आँचल में बहती हैं!

रणभूमि में दमक उठा जो, महाराणा का भाला था,
गुरु गोबिंद सिंह के बेटों का, वो बलिदान निराला था।
बंदा सिंह बहादुर की गाथा, दीवारों में चुनवाए लाल,
मातृभूमि की रक्षा हित जो, काल के आगे बने महाकाल!

मंगल पांडे की पहली गोली, लक्ष्मीबाई की हुंकार,
तात्या टोपे की गोरिल्ला रण, बिस्मिल की वह तेज कटार।
सावरकर का अखंड स्वप्न, और तिलक का शंखनाद गंभीर,
नेहरू, शास्त्री के संकल्पों से, बदली इस देश की तकदीर!

श्वेत क्रांति के दुग्ध-बाढ़ से, हरित क्रांति का धान यहाँ,
परमाणु की महाशक्ति से, पोखरण का उत्थान यहाँ।
डिजिटल भारत की नई सुबह, हर हाथ में अब संसार हुआ,
आत्मनिर्भरता के मंत्र से, हर सपना अब साकार हुआ!

'कृण्वन्तो विश्वमार्यम्' का, जो जग को संदेश सुनाता है,
'सत्यमेव जयते' का नारा, जिसके मस्तक पर भाता है।
हे भारत भाग्य विधाता! तेरी यह अलौकिक कीर्ति अमर रहे,
युग-युगांतर तक इस जग में, तेरा ही पावन नाम रहे!

रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)




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