देवकी मां के जीवन में
जब घोर अंधकार छाया
तब स्वयं प्रभु ने धरा पर
अवतरित होने का विचार किया
मन में प्रभु ने ठाना
धरती का कष्ट मिटाना
हर उदास चेहरे पर
खुशियों का गीत सजाना
मां देवकी के आंगन में
स्वयं नारायण को आना पड़ा
भाद्रपद की कृष्ण अष्टमी को
साक्षात नारायण प्रकट हुए
पापों का बोझ मिटाने को
गोविंद का धरा पर आगमन हुआ
घोर अंधेरा चीर कर
प्रभु ने उजाला बनकर
नया सवेरा किया
सृष्टि को धर्म का पाठ पढ़ाने
लीलाधारी का अवतरण हुआ
एक मां ने जन्म दिया,दूजे ने पाला
कितने भाग्यशाली हैं हमारे नंदलाला
भाग्य का खेल कितना निराला
देवकी मां का कान्हा यशोदा मां का लाला
मिश्री से भी मीठे हैं हमारे कृष्ण कन्हैया
पार लगाएंगे हमारी डूबती नैया
आइए हम सभी मिलकर मनाएं
कान्हा का जन्मदिन जय हे नंदलाला कृष्ण कन्हैया।।
हैप्पी कृष्ण जन्माष्टमी
जय श्री कृष्णा राधे राधे
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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