1. हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते।
जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन
ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते।
शहद जीने का मिला करता है थोड़ा थोड़ा
जाने वालों के लिये दिल नहीं थोड़ा करते।
लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो
ऐसी दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते।
2. ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा।
अपने साए से चौंक जाते हैं
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा।
रात भर बातें करते हैं तारे
रात काटे कोई किधर तन्हा।
डूबने वाले पार जा उतरे
नक़्श-ए-पा अपने छोड़ कर तन्हा।
दिन गुज़रता नहीं है लोगों में
रात होती नहीं बसर तन्हा।
हम ने दरवाज़े तक तो देखा था
फिर न जाने गए किधर तन्हा।
3. दर्द हल्का है साँस भारी है
दर्द हल्का है साँस भारी है
जिए जाने की रस्म जारी है।
आप के बाद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है।
रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो
दिन की चादर अभी उतारी है।
शाख़ पर कोई क़हक़हा तो खिले
कैसी चुप सी चमन पे तारी है।
कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है।
Article by
Admin - Reena Kumari Prajapat 


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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