एक आरज़ू है उसकी कुछ कर गुज़रने की,
काँटों से भरी राह है उसके कर गुज़रने की।
बहुत से फ़न फैलाए खड़े हैं नाग रहगुज़ार में उसके,
मगर आदत है उसे फ़न कुचल कर गुज़रने की।
आस-पास हवस के दरिंदों की दुनिया है उसके
,है ताक़त उसमें शैतानों में दुर्गा बन कर गुज़रने की।
उस दलदल में भी खिल रही है वो कँवल की तरह,
कहाँ औकात है किसी की उसे नापाक कर गुज़रने की।
है सादगी में उसकी कशिश किसी फरिश्ते सी,
हैं हज़ारों नज़रें मुंतज़िर उसे छू कर गुज़रने की।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







