कलम की जब से इनायत हुई है
जिंदगी के हर रंग से मोहब्बत हुई है
अब तो एक पल भी कटता नहीं
वक्त इसके बिन
ये मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गई है
वक्त बे वक्त आ जाती है हाथों में
इसको भी शायद मेरी आदत हो गई है
ये भी मेरे बिना नहीं रह पाती है
जब देखो तब हाथों में आने के लिए
बेचैन हो जाती है
देखने में भोली-भाली है
लेकिन दिल चुराने वाली है
चाह कर भी इससे दूर नहीं रह पाती
पता नहीं कौन सा जादू कर डाली है
दिल में इस कदर समा गई है
जैसे मेरी जिंदगी की डोर इसी ने संभाली है
लाल हरी पीली सब रंगों की मिलती है
मन के भावों को, दिल के जज्बातों को
बहुत खूबसूरती से पन्नों पर बिखेरती है
सच में, इसने मेरा दिल जीत लिया है।।
-ममता तिवारी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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