(कविता)
अपने भीतर
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मानव
बिना किसी ईर्ष्या द्वेष के
बसा ले
अपने हृदय घट के गहरे तल में
सिर्फ और सिर्फ़
शांति का एक अलौकिक टुकड़ा
हमेशा के लिए सुखी हो जाएगा ।
अगर दया मया करुणा के दीप जला ले
मन के अँधेरे कोने में कहीं
सर्वश्रेष्ठ कहलाएगा ।
सभी चर-अचर जीव धारियों एवं
जल-स्थल में निरंतर
भाग्यशाली रहेगा सदा ।
देह के प्रत्येक अंग-अंग को
कर ले निरोगी
लगा ले जुबां पर लगाम
जीवन को बाँधें नहीं किसी
अनर्गल खूँटे से कभी ।
गरीब आदमी भी हो सकता है
दुनिया का सबसे बड़ा अमीर
केवल अपने भीतर रख ले
संतोष का अनमोल खजाना ।
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~राम नरेश 'उज्ज्वल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







