Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।


Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat


Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.



The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

Newहैशटैग ज़िन्दगी पुस्तक के बारे में updates यहाँ से जानें।

Newसभी पाठकों एवं रचनाकारों से विनम्र निवेदन है कि बागी बानी यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करते हुए
उनके बेबाक एवं शानदार गानों को अवश्य सुनें - आपको पसंद आएं तो लाइक,शेयर एवं कमेंट करें Channel Link यहाँ है

The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

ज़ुल्मी दर्द क़ो हमारी मुहब्बत ही क़बूल हों गई

उस ख़ुदा सें भी आखिर ये कैसी भूल हों गई
ऐसी लड़की बना दी जो पाऊँ की धूल हों गई

मुँह खोला ज़ब ख़ुद के इंसाफ के ख़ातिर मैंने
उनकी आँखों की जैसे चुभने वाली शूल हों गई

दर्द के हाथों छिल गया नसीब,लहुलुहान हुए हैं
और बची लक़ीरे भी वक़्त सें नामाकूल हों गई

एक दफ़ा दर्द क़ो हँस कर क्या सह लिया हमने
ज़ुल्मी दर्द क़ो हमारी मुहब्बत ही क़बूल हों गई

एक उम्मीद ये के कुछ तों सही होगा किस्मत में
पऱ किस्मत हैं क़ि दर्द देने में ही मशगूल हों गई

कृष्णा हार गई अपनों क़ो समझाते-समझाते ही
रवायत के आगे आख़री बात भी फ़िज़ूल हों गई...
-कृष्णा शर्मा




समीक्षा छोड़ने के लिए कृपया पहले रजिस्टर या लॉगिन करें

रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (5)

+

Devender Kumar said

you are a greatest shayar, you have a pain of stabbing dagger of world in depth of heart, that is qualification of a shayar and what more language is only medium to put the pain in right saucer

कृष्णा शर्मा replied

Sir🙏
I am deeply grateful for your kindness in deeming me capable. This is a very big compliment for me...
Thank you sir🙏

Lekhram Yadav said

ज़ुल्मी दर्द क़ो हमारी मुहब्बत ही क़बूल हों गई, बहुत सुंदर रचना आपको सादर नमस्कार।

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏
सादर नमस्कार 🙏😊

अनिल भारद्वाज एडवोकेट said

दर्द के हाथों छिल गया नसीब लहुलुहान हुए हैं।------बेहतरीन पंक्तियां, बहुत सुंदर रचना।

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏😊

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

वाह क्या शेर लिखा है आपने वाह! आपकी ये रचना लड़कियों की हृदय की वेदना का प्रतिनिधित्व करती है। खुदा से खूबसूरत शिकायत, ज़माने की फितरत की। सुन्दर भाव 👌🙏 हरेक पंक्ति में वर्तमान की हकीकत की कड़वाहट।

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏😊

पवन कुमार "क्षितिज" said


एक दफ़ा दर्द क़ो हँस कर क्या सह लिया हमने
ज़ुल्मी दर्द क़ो हमारी मुहब्बत ही क़बूल हों गई..ये पंक्तियां तो सुभानअल्ला..

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏😊

कविताएं - शायरी - ग़ज़ल श्रेणी में अन्य रचनाऐं




लिखन्तु डॉट कॉम देगा आपको और आपकी रचनाओं को एक नया मुकाम - आप कविता, ग़ज़ल, शायरी, श्लोक, संस्कृत गीत, वास्तविक कहानियां, काल्पनिक कहानियां, कॉमिक्स, हाइकू कविता इत्यादि को हिंदी, संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, इंग्लिश, सिंधी या अन्य किसी भाषा में भी likhantuofficial@gmail.com पर भेज सकते हैं।


लिखते रहिये, पढ़ते रहिये - लिखन्तु डॉट कॉम


LIKHANTU DOT COM © 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम
Designed, Developed, Maintained & Powered By HTTPS://LETSWRITE.IN
Verified by:
Verified by Scam Adviser
   
Support Our Investors ABOUT US Feedback & Business रचना भेजें रजिस्टर लॉगिन