तुम घरों से निकल पड़ो, कि ज़माने उठने वाले हैं..
अपने दिलों की कह दो तुम, अफ़साने उठने वाले हैं..।
बहुत दिनों से हैं, सब साज़-साजिंदे खामोश यहां..
मुहब्बत का नग़्मा गा लो तुम, तराने उठने वाले हैं..।
कली के मुस्कुराने का, सबब न पूछना यारो..
उसकी उमीद-ए-नज़र कहती है, वीराने उठने वाले हैं..।
कहानी बनकर रह गई, तेरे आबाद शबिस्ताँ की..
कारवाँ रुख़सत हो गए, और शामियाने उठने वाले हैं..।
इस महफ़िल की कर लो तुम रस्म अदायगी जी भर के..
शमा सारी जल चुकी, और दीवाने उठने वाले हैं..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







