राज़ दफन कई अधरों पर मुझसें वो बताये न गए
ज़ख्म भी ऐसे थे जो चाह के हमसे दिखाए न गए
बर्बादी की बुलंदी में नाम शामिल कई अपनों के थे
बेबसी लाचारी ऐसी थी नाम कभी गिनवाये न गए
चोट दिल पऱ ऐसी लगी जिसने रूह ज़िस्म तार किये
अश्क़ आँखों में ऐसे बसे हमसे वो भी छिपाए न गए
फेरहस्ती शामिल अपनों की,रिश्ते भी कई भरमार थे
धोखे इतने मिले हमसे फिर अपने आज़माये न गए
ज़ख्म चाहे जितने मिले पऱ प्यार तो लाज़िम था ना
नसीबी ऐसी लिखी हम प्यार सें भी बतियाये न गए
रोज़मर्रा की जिंदगी में दुआएं शामिल रोज़ रहती हैं
फिर भी राम तुझसें लक़ीरो सें ये दर्द मिटाये न गए
दिल जला के ख़ाक किया रूह क़ो लहूलुहान किया
तेरे इश्क़ के अरमाँ युहीं रवायत की भेंट चढ़ाये न गए
तेरे सज़दे में बैठी रही,मैं उम्रभर वफ़ा निभाती रही
फिर क्यूँ मुझ पऱ कभी इश्क़ के लम्हें लुटाए न गए
ज़ख्मो की तादात इतनी थी आँखों ने हार मान ली
अश्क़ो का सागर बना फिर भी ये दर्द भुलाये न गए
मेरा जीवन बर्बाद किया दिल जला के राख़ किया
मूतमईन ख़ुदा पे हूँ किसी के दीपक बुझाये न गए
ख़ुदखुशी भी करते तेरी तसल्लीया भी करते जानाँ
कुछ बेटी के फर्ज़ थे,मौत के फ़रिश्ते बुलाये न गए
चाहे जैसे भी हालात थे चाहे रूह ज़िस्म बर्बाद थे
फिर भी कृष्णा हम किसी के दर बिन बुलाये न गए..
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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