संग्राम से शुरू करो,
अभिमान से लड़ सको,
अभिशाप से लड़ सको,
अपमान से लड़ सको,
तो हो ये संग्राम,
संग्राम से विश्व विजित क्यूँ करना,
विजित ही हो पूरा संग्राम,
ना शेष रहे ना क्लेश रहे,
जीवन विजित हो,
तो हो जाये संग्राम,
ये संग्राम कब पूरा हो विराम,
ये संग्राम,
ना हो जीत हार विश्राम
संग्राम,
शुरू हो संग्राम,
मन खुलकर,
हाँ युद्ध करें,
क्यूँ भीतर करना वार,
मुझे जीतकर वश में करना,
अपना करना काम,
लेकिन अब मन से है संग्राम,
ये संग्राम,
मन को चुनौती देगा,
मेरा ये संग्राम,
ये संग्राम,
एक साँस में पूरी होगी संग्राम की रीत,
अगली साँस का धीर नहीं ना अगले से प्रीत,
संग्राम की जीत संग्राम की जीत।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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