शायद कोई कहता होगा के खुदा नहीं है
बकिए सभी लोग कहते हैं कि खुदा है
खुदा देखने की तमन्ना किस दिल में होगा
सिर्फ़ कह देना काफ़ी नहीं तहकीक लाज़मी है
हम बंदे हैं खुदा की उन्हें देखना दिल में आया
अगर ये ख्याल गलत है तो दिल खुदा का नहीं है
दिल अपना नहीं देख सकते आख़िर ऐसा क्यूं है
मुर्दा दिल क्या जाने ज़िंदा दिल का ये सवाल है
इन्सान से सवाल नहीं पूछते चालीस उम्र से कम है
नफ्स उरूज़ में हो जिसका सोच से खाली होता है
हम हर की बातों का ज़वाब नहीं देते कुछ समझा है
थेथरलोजी नहीं पढ़ा है हमने हुज्जत में शैतान होता है
बचपन में एक गैबी आवाज़ सुना था दुनियां तुम्हारा नहीं
तबसे अबतक दिल में है ये आवाज़ क्यूं कहां से आई है
जानने वो समझने का दिल दिमाग बन गया है वसी का
कौन क्या चाहता क्या करता है वे जाने हम उनमें नहीं हैं
हम एक सर्किल में हैं जो एंगिल से गोलाई तक पहुंचती है
वसी अहमद क़ादरी । दरवेश। लेखक ।
मुफक्किर ए कायनात। मुफक्किर ए मखलूकात


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







