बच्चों!!
अस्पताल में
तुम्हें चुप कराने के लिए
रात भर,खड़े होकर
इधर उधर चलकर
अपनी बाहों में झूलाने का
मुआवजा, हमें नहीं चाहिए
हर कांटों को
तुम्हारे पांवों के करीब
आने से पहले,हटा देने की
कीमत, हमें नहीं चाहिए,
तुम्हारी खुशी के लिए
अपने सारे अरमानों का
गला घोंटने के बदले में
कुछ भी, हमें नहीं चाहिए,
तुम्हारे सामर्थ्य से
कमायी हुई दौलत का
एक पाई, हमें नहीं चाहिए,
बस,
जब हमारी बूढ़ी हड्डियां
जवाब देने लगे,
लाठी पर उंगलियों की पकड़
ढीली पड़ने लगे,
पुतलियां झुर्रियों के झरोखों से
झांकने लगे,तब
हमारे करीब आकर,
हथेलियां अपने हाथों में लेकर
चंद लम्हें, बातें करना
हम समझेंगे, यही हमारी
पूरे जीवन की कमाई है,
हमें वृद्धाश्रम मत भेजना
हमें वृद्धाश्रम मत भेजना!!
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







