संविधान और अधिकार
एडवोकेट शिवानी जैन Byss
भारत की आत्मा है, पावन विधान यह,
लोक के तंत्र का, अनूठा वरदान है।
अधिकार की मशाल, न्याय की डगर चले,
समानता का भाव, भारत की शान है।
भेद और भाव तजे, बंधुत्व की धार बहे,
मानवता हेतु बना, अमित विधान है।
शोषित अनाथों को, संबल प्रदान करे,
निर्बल को देता सदा, गौरव की तान है।
सत्य का आधार लिए, संविधान अडिग है,
जन-जन हेतु बना, सुरक्षा का कवच।
स्वतंत्रता की गूँज, दिशाओं में गूँजती है,
लहराता विश्व में, तिरंगा का यह ध्वज।
न्याय की तराजू बनी, नियम की मर्यादा में,
शांति और शक्ति का, होता यहाँ उदय।
अधिकारों की रक्षा, कर्तव्य की प्रेरणा है,
राष्ट्र की एकता का, करता यह जय-जय।
लोकतंत्र का आधार, जन-गण-मन का स्वर,
संविधान ही हमारा, सबसे महान है।
भीम की कलम चली, देश का भाग्य लिखी,
कोटि-कोटि भारतीयों, का यह अभिमान है।
नियमों की ज्योति जगी, अंधकार दूर हुआ,
स्वर्ण युग लाने वाला, यही एक गान है।
संविधान साक्षी है, न्याय के प्रवाह का,
अधिकारों से सुसज्जित, प्यारा हिंदुस्तान है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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