वो एक शख़्स कितना रुलाता है,
कहाँ से उठकर कहाँ इश्क़ कर जाता है...
हमें मालूम नहीं था कि इश्क़ ही करना है,
जहाँ आकर जहां का सारा ज़िक्र डर जाता है।
ये मोहब्बत का नशा,
उनकी आँखों के गिरते आँसू में बहाना था,
वो नहीं जानते हैं,
हमें इसका भी कर्ज़ चुकाना था।
दर्द के दर्द में,
दर्द की लिखी कहानी को भी,
दर्द का गुनाह बताना था,
हमारे लिए कौन सा ज़माना था,
तुम्हारे लिए कौन सा ज़माना था।
मोहब्बत करके तो, हम भी तो बर्बाद हुए हैं,
तन्हाई तुम्हें भी थी,
और तन्हाई से हमें भी गुज़र जाना था...
वो कहेगी एक दीवाना था।
क्या मैं उसको ही जानने लगा हूँ,
जिसे मैं छूकर आया था?
मेरा एक फ़साना था,
उसमें उसका छुप जाना था,
उसे जो बताना था,
उसी का आलम यहाँ मेरे साथ गुज़र जाना था।
बड़ी देर हो जाती है मोहब्बत को अपने पास लाने में,
और उसके पास जाने में,
कितना मैं चला हूँ यह मेरे पैर भी जानते हैं।
जहाँ मैं थका नहीं वहाँ तो मैं गिर गया,
और जहाँ मैं थक गया वहाँ क्या हुआ कि संभल गया।
बाकी क्या मुझे ही खुद को बताना था,
उसका भी तो कोई न कोई एक कहानी का हर्जाना था,
क्या उसे नहीं चुकाना था...
फिर भी चलो हम कह देते हैं,
हम खुद के जालिम हुए अगर...
हमें ही सब कुछ बयां कर जाना था,
तो उसके दिल को कुरेद कर हमें क्या छुपाना था!
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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