वो कौन सी आग, सीने में धधक रही है,
एक मौन सी राग, दिल में सिसक रही है।
उसने ना कह दिया, हमने मान लिया
फिर भी चिराग, दिल में भभक रही है।
ये रास्ता दिवानगी का है,या कुछ और
आगे चलने से पहले, पांव ठिठक रही है।
इसके पहले तो ऐसा, कभी नहीं हुआ
बोलने से पहले ही, जुबां झिझक रही है।
करवटों ने साथ निभाना, शुरू कर दिया,
नींदों की बेरूखी से, आंखें कसक रहीं हैं।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







