मैं तो न जाऊँगा स्कूल माता,
चाहे दिखा लो कितनी भी गुस्सा का नाता,
मैं रोऊँगा इधर-उधर भागते-भागते,
तुम पकड़ना मुझको जागते-जागते,
चाहे लगा लो कितनी भी डाँट,
मैं तो न छोड़ूँगा आपके पल्लू से हाथ...।।
कट्टी हो जाऊँगा मैं अब आपसे,
मैं न खाऊँगा खाना, चाहे बुन लो प्यार का ताना-बाना,
अरी मैया डाँट लो मुझको जितना भी,
पापा को आने दो मैया,
मैं उनको बताऊँगा, आपको उनसे डाँट खिलाऊँगा...।।
पटकूँगा बस्ते को और शरारत मचाऊँगा,
भागूँगा गली-गली आपके हाथ न आऊँगा,
रोओगी तुम ही मैया जब मैं नजर न आऊँगा,
अरी मैया अपने लाडले को कौन सताता है,
खेलने दो थोड़ा सा अभी उम्र ही क्या है...।।
मेरी प्यारी मैया तुम इतना डाँटती क्यूँ हो,
अपना मुँह छिपाकर मुझसे, तुम इतना रोती क्यूँ हो,
अब मुस्कुराओ भी मेरी प्यारी मैया,
लेके चलो अब प्यार की डगर में नैया...।।
- सुप्रिया साहू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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