ट्रेन आ रही थी या तुम आ रही थी
दूर कहीं धुंधले आसमान में कोई दुआ आ रही थी
पटरी के कंपन में मेरा दिल धड़क रहा था
जैसे रूह को अचानक तुम्हारी याद आ रही थी
मैने देखा तो धुआं था पर महक तुम्हारी थी
हवा में सरगोशियां थी पर बात तुम्हारी थी
हर आते पहिए में एक उम्मीद घूम रही थी
शायद ये सफर नहीं मेरी तकदीर लौट रही थी
हर डिब्बे की खिड़की से उम्मीद झांक रही थी
जैसे किसी चेहरे पर तेरा नाम ढूंढ रही थी
मैने सांसे थाम कर पल को थामा
तो लगा जिंदगी की ओर पहली हवा आ रही थी
तुम पास नहीं थी फिर भी महसूस हो रही थी
हर धड़कन में धीमी सी तुम्हारी आवाज आ रही थी
शायद ये सफर नहीं कोई चुप कहानी थी
जो मेरी आंखों से होकर झलकती जा रही थी
मैं पटरी के उस मोड़ पर कुछ देर ठहरा रहा
जैसे वक्त भी तुम्हारी यादों में उलझ चुकी थी
दूर तो थी पर दिल में फासला कहां था
हर कदम पर लगता जैसे तुम्हीं लौट रही थी
कसम से समझ नहीं आया अब तक
ट्रेन आ रही थी या तुम आ रही थी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







