बोलकर पछताना के ये अच्छा नहीं हुआ हरगिज़ मत सोचना
सोचकर बोलना व ख़ामोश रहना सदा अच्छा होता है जीवन में
इल्म वाले लब लब नहीं बोलते कभी वक्त पर तकरीर करता है
दिल जुई तकरीर मुफाद में दोनों जहान केलिए अच्छा नहीं होता
पैसा ज़रूरत है ज़िंदगी केलिए दूसरे की ज़िंदगी छीनकर जीना अच्छा नहीं
दौलत रहते न सेहत न ही खैरियत पूछने वाला हुआ ऐसा देखा है हमने
औलाद भी रहमत नहीं गर तरबियत में पोसा नहीं गया इसे जहमत समझना
नाज़ प्यार से पाला गया औलाद नखरे बाज जो समाज केलिए ज़हर होता है
ज़हर किसी को पसंद नहीं नखरें बच्चे का मां बाप बर्दास्त करे दूसरा नहीं करता
अदब ,तमीज़,तहज़ीब जिसमें नहीं ऐसा ऑफिसर भी समाज के लिए अच्छा नहीं होता
ज़िंदगी है क्या हरेक को समझना होगा खुदा को समझने से पहले ज़िंदगी
खुदा देखने में नहीं किरदार अपना नज़र नहीं आता दूसरे का नज़र आता है
वसी अहमद क़ादरी । वसी अहमद अंसारी ।
मुफक्कीर ए कायनात । मुफक्कीर ए मखलूकात


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







