कहीं खो गई वो धूप बचपन कि
प्यारी थी वो न्यारी थी छिप गई कहीं
तप रहे अगन में आज छाँव सो गई
कहीं खो गई वो धूप बचपन कि
आवाज़ हमारी आसमां में उड़ रही
बादलों से भीड तलाशे-ए-रश्मि कर रही
आयु तमाशा लुप्त जादू-ए-चमत्कार कर गई
कहीं खो गई वो धूप बचपन कि
नित्य नवल बोध-ए-अध्याय भर रही
बिखरे स्मरण में सांस-ए-सौगात दे रही
अपनेपन की समझ में संस्कार भर गई
समर्पण और त्याग कर सब्र दे रही
कहीं खो गई वो धूप बचपन कि
गुजर गई वो गलियों जो प्रीत गीत गा रही
सुकुन से लबालब बचपन गलियां पुकार रही
रूठा तो क्या झाँक ख़ुदमें,'मैं' बचपना भर गई
तन्हाई में आऊंगी सुनहरी पंख दर्श दे रही
कहीं खो गई वो धूप बचपन कि.....


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







