दिल को अब, किसी मंजिल की तलाश नहीं..
हाथ खाली है, मगर ज़िन्दगी बदहवाश नहीं..।
अब रू-ब-रू है, इस जहाँ का हर इक चेहरा..
मगर पर्दा हटा के देख लें, इतना होशोहवाश नहीं..।
फैला हुआ है मेरा, ख्याल-ए-मुहब्बत सितारों तलक..
देखा है मैने, चश्म-ए-दायरा से बड़ा ये आकाश नहीं..।
हर मर्ज़ की दवा का, इल्म होगा उनके पास मगर..
दर्द-ए-दिल मिटाने वाला, कोई ग़म-तराश नहीं..।
हर रोज़ मौज़-ए-साहिल, वही अंज़ाम दोहराता है यहां..
जान के भी क्यूं इस बात का, कोई राज़-फाश नहीं..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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