नज़रे उतरने लगी दिल की जमीन पर।
सुहाना सफर टिका हुआ जहीन पर।।
मन कली सा खिला अंगड़ाईयां लेता।
बेताबी का महोत्सव फैलेगा मून पर।।
एक साथ उठ खड़े होंगे हृदय के भाव।
खूब दूर तक सैर-सपाटा होगा मून पर।।
तपती दोपहर भी देखेंगे और शाम भी।
ठहरना पड़ेगा ढलती रात तक मून पर।।
बढ़ेगी धड़कनो में पत्तों सी सरसराहट।
स्वप्न में देहरी लेंगेगा 'उपदेश' मून पर।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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