सितारों के मेले में,चांदनी सी रहती है,
सारा घर चमकता है, लाडली जो हंसती है।
अंगना में गीतों की,महक चली आती है,
नन्ही नन्ही पांवों में, जब पैजनी छनकती है।
आंखों की शरारत भी, मखमली झलकती है
तुतली तुतली बोली से, मोतियां बरसती है।
अच्छा नहीं लगता है, उसके नहीं होने से,
मौसमों के रंगीनी, फीकी फीकी लगती है।
उत्सवों की रोशनी तो, शामो-सहर होती है,
उछल कूद में उसकी,परियां उतरती हैं।
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







