सिफ़ारिश
अब केवल नौकरी नहीं दिलाती।
वह आदमी की ऊँचाई भी तय करती है।
कौन आगे बैठेगा,
किसकी फ़ाइल पहले खुलेगी,
किसकी गलती
योग्यता कहलाएगी—
सब कुछ
पहले से लिखा होता है।
जिसके पास
किसी बड़े आदमी का नाम है,
उसे प्रमाणपत्रों की ज़रूरत कम पड़ती है।
और जो
अपनी मेहनत का परिचय लेकर आता है,
उसे
बार-बार अपना परिचय देना पड़ता है।
धीरे-धीरे
विद्यालयों से लेकर दफ़्तरों तक,
प्रतिभा ने
दरवाज़े खटखटाने छोड़ दिए हैं।
अब वह
चुपचाप लौट जाती है,
क्योंकि उसे पता है—
यहाँ दरवाज़े
कुंडी से नहीं,
सिफ़ारिश से खुलते हैं।
और सबसे बड़ा दुख यह नहीं कि
अयोग्य लोग आगे निकल जाते हैं।
सबसे बड़ा दुख यह है कि
योग्य आदमी
एक दिन
अपनी योग्यता पर ही
संदेह करने लगता है।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







