ये दुनिया की सबसे अलग ही प्रेम कहानी है,
जहाँ महलों की रानी,
एक शमशानवासी की दीवानी है।
ना सोने का सिंहासन,
ना रेशमी आभूषणों का भार,
भस्म लिपटा तन,
और गले में सर्पों का हार।
वह कैलाश की बेटी थी,
सौंदर्य की पूर्ण परिभाषा,
और वह विरागी,
जिसके चरणों में सिमट गई हर अभिलाषा।
जहाँ लोक-लाज ठिठकती है,
वहाँ उसने पथ चुना,
शमशान की राख में
अपने जीवन का अर्थ बुना।
वह हँसी महलों में सीखी,
तो वह मौन में रम गया,
एक ने त्याग सिखाया,
दूसरा स्वयं त्याग बन गया।
ना प्रश्न किया,
ना शर्तों का कोई लेखा,
प्रेम जब तप बन जाए,
तो संसार का भय किसने देखा?
डमरू की नाद में
उसने संगीत पाया,
और जटाओं की छाया में
अपना सम्पूर्ण संसार बसाया।
यह प्रेम नहीं था केवल,
यह चेतना का विस्तार था,
जहाँ भोग और योग मिले,
वही तो सृष्टि का सार था।
शमशान भी पावन हो उठा,
महल भी साधना बन गया,
जब पार्वती ने शंकर को चुना,
तो प्रेम स्वयं शिवत्व बन गया।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







