मुहब्बत की बारिश में भी, खुश्क–ए–दिल रह गया..
कांटों को अपना बना लिया, गुल मुक़ाबिल* रह गया..।
कैसे–कैसे महल तामीर किए, हमने हाथों से अपने..
सब कुछ पाया मगर, ज़िंदगी–ए–हासिल रह गया..।
तेरे घर की जानिब, हर राह में है पेच-ओ-ख़म बहुत..
सफ़र तो चला मगर, वो दयार–ए–मंज़िल* रह गया..।
उसकी ज़फा को भी, दिल क्यों अब वफ़ा कहता है..
अपना होकर भी कहां, एतिबार के काबिल रह गया..।
उसकी तलाश भीतर करें, कि बाहर मालूम नहीं है..
उसके बाद भी नाम मेरा,उसके साथ शामिल रह गया..।
* मुक़ाबिल–दुश्मन।
* दयार ए मंज़िल–बीच राह में।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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