सारे सपने सच हो जाएँ, ऐसा होना संभव कहाँ,
पर सपनों के बिन जीवन में, खिलता आशा-उद्यान कहाँ।
सपने केवल रात्रि नहीं हैं, मन का मौन निमंत्रण हैं,
अंतर में सोई संभावनाओं के प्रथम स्पंदन हैं।
इनकी कोमल छाँव तले ही, कल्पनाएँ आकार धरें,
सूखे मन के निर्जन वन में, नव विश्वास के फूल झरें।
सपनों से ही रंग चुराकर, भोर सुनहरी होती है,
इनकी धुन पर चलकर ही तो, राह नई संवरती है।
आँखों में जब दीप जलें तो, पग भी गति पहचानें हैं,
अनदेखे से क्षितिजों तक फिर, साहस अपने जाने हैं।
सागर पहले मन में बहता, तब धरती पर धारा है,
हर निर्माण की नींव तले, कोई स्वप्न ही प्यारा है।
मिट्टी में जब बीज उतरता, वृक्ष नहीं कहलाता है,
पहले अंकुर बनता है वह, फिर आकाश छू जाता है।
कितने युग की खोज समेटे, मानव का इतिहास रहा,
हर उपलब्धि के पीछे कोई, अनदेखा विश्वास रहा।
सपने नभ के तारे जैसे, दूर बहुत, पर अपने हैं,
अंधियारे की नीरवता में, सबसे उजले सपने हैं।
कुछ सपनों की साँस अधूरी, कुछ को मंज़िल मिल जाती,
कुछ इतिहासों में ढल जाते, कुछ स्मृतियों में रह जाती।
हर धड़कन के मौन राग में, स्वप्नों का संगीत बसा,
हर सृजन के प्रथम क्षणों में, उनका अनुपम गीत बसा।
सारे सपने सच न भी हों, उनका होना व्यर्थ नहीं,
स्वप्न नहीं तो जीवन केवल, चलता है—पर अर्थ नहीं।
जो आँखों में जन्मे सपने, वे ही युग का मान बने,
मानव के अंतर-आकाश में, सबसे उज्ज्वल प्राण बने।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







