"जीवन के नवरस एक साथ🌈
राधा के नैनों का श्रृंगार जब मधुर मुस्कान बिखेरे,
गोपाल की बातों का हास्य सुन गोपियाँ हँस-हँस लोटें।
सीता-हरण पर राम का करुण क्रंदन धरती चीर दे,
द्रौपदी-चीर पर भीम का रौद्र रूप काल बन गरजे।
कुरुक्षेत्र में भीष्म का वीर शर-शैया पर सोए,
लंका दहन का भयानक दृश्य देख राक्षस दल काँपे।
कटे मुंडों की वीभत्स भूमि पर कौए मंडराएँ,
कृष्ण का अद्भुत विराट रूप देख पार्थ स्तंभित रह जाए।
शिव तांडव का रौद्र जब डमरू नाद सुनाए,
मीरा के पद का श्रृंगार जब श्याम मिलन गीत गाए।
हरिश्चंद्र का करुण सत्य पर अडिग खड़ा रह जाना,
अभिमन्यु का वीर चक्रव्यूह में हँसकर प्राण गँवाना।
पूतना वध का भयानक रूप देख गोकुल सहम जाए,
कालिया नाग पर अद्भुत नृत्य जब कान्हा रचाए।
शूर्पणखा का वीभत्स रूप देख लक्ष्मण मुस्काएँ,
जनक की सभा में शांत राम धनुष तोड़ दिखाएँ।
बुद्ध का शांत बोधिवृक्ष तले निर्वाण पाए,
नौ रसों की ये धारा जीवन का सार बताए।
हँसी-खुशी, प्रेम-विरह, क्रोध-करुणा सब संग लाए,
रति से निर्वेद तक काव्य जगत जगमगाए।।
यशोदा का करुण विलाप जब कान्हा गोकुल छोड़े,
कैकेयी के वीभत्स वचन से राम वन को मोड़े।
गांधारी का रौद्र श्राप जब कृष्ण को लगे,
उर्मिला का शांत विरह चौदह वर्ष तक जगे।।
एक ही जीवन में देखो नौ रंगों का मेल,
कभी बसंत श्रृंगार का कभी रौद्र का खेल।
नवरस से सजता काव्य नवरस से संसार,
भावों के नौ दीप जलें यही सृष्टि का सार।।
रचनाकार - पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार)


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







