मैंने उससे प्रेम करते हुए
उसकी हँसी से ज़्यादा
उसकी चुप्पियों को सुना,
वे चुप्पियाँ
जो हर रात
तकिये में मुँह छिपाकर रोती थीं।
मैंने कभी नहीं पूछा
कि उसे क्या पसंद है,
मैंने पूछा—
“कौन सी बात है
जो अब तक तुम्हें भीतर से तोड़ती है?”
उसके चेहरे पर नहीं,
मैंने प्रेम किया
उस थकान से
जो दुनिया से लड़ते-लड़ते
उसकी आँखों में उतर आई थी।
मैंने प्रेम में नहीं कहा—
“तुम मेरी हो।”
मैंने बस इतना कहा—
“अगर कभी बहुत थक जाओ,
तो मेरे पास बैठ जाना,
मैं तुम्हें
किसी सवाल की तरह नहीं,
एक अधूरी कविता की तरह सुनूँगा।”
✍️✍️ विलोम


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







