कविता :प्रभु की माया
दिनांक:29/05/2026
प्रभु की माया ऐसी हैं जिसको न हम कभी जान सके।
ईश्वर में विश्वास अटूट हो हर बंधन को हम तोड़ सके।
इस जग में ऐसी कोई जंग नहीं जिसको हम जीत न सके।
इस जग में ऐसा कोई मार्ग नहीं जहां से वापस लौट न सके।
इस मन में ऐसी कोई सोच नहीं जिसको हम बदल न सके।
इस धरा जैसा कोई ग्रह ही नहीं जहां जीव जीवन जी भी सके।
इस जग में ऐसी कोई चीज नहीं जिसको हम त्याग न सके।
इस जग में ऐसा कोई ज्ञान नहीं जिसको हम सिख न सके।
इस जग में ऐसा कोई भजन नहीं जिसको हम भज न सके।
इस जग में ऐसी चीज नहीं जिसको हम बना न सके।
इस जग में ऐसा खेल नहीं जिसको हम खेल न सके।
इस जग में ऐसा रोग नहीं जिसको हम मिटा न सके।
इस जग में ऐसा उपहास नहीं जिसको हम कर न सके।
इस जग में ऐसा विचार नहीं जिसको हम बदल न सके।
ईश्वर की माया ऐसी हैं जिसको न हम कभी जान सके।
ईश्वर में विश्वास अटूट हो हर बंधन को हम तोड़ सके।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान 💞✒️💞


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
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