भोर हुई है जागो पंछी,
पथ की आस जगा दो तुम,
मिटा दो हमारे सारे भ्रम,
देख रहा है राह को पथिक,
मोड़ आने पर उलझ गया,
रात को पेड़ की छाया नीचे,
गहरे सपनों में खो गया,
अब इसको तुम्हें जगाना है,
उस मोड़ से आगे बढ़ाना,
जीवन का महत्व समझाना है,
वक्त पर काम कर जाना,
कम से कम उलझाना,
यूं दिल से राहत बताना है,
जीवन का वो सार ना भूले,
तुम्हें अपना जीवन उसे दिखाना है,
उसकी जीत में, राह में, सफ़र से सफ़र में,
तुम साथ होंगे,
तुम उसके पास होंगे,
अपनी कहानी का राज़ बताना है,
पंथी को राह बताना है,
पंथी को राह बताना है।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







