महादेव मैं आपकी पैरों के खड़ाऊ आपके चरणों की धूल बनू।
मैं आपके शृंगार का भस्म बनू। जो मुझे आपके समीप लाये वो हर एक चीज़ बनू।
जहाँ हमें आपसे मिलने का सौभाग्य मिले वो श्मशान बनू। जो खोले आप जटा अपनी तो मैं आपके अभिषेक का गंगाजल बनू। जो चढ़े हर्ष उल्लास आपके ऊपर तो उसमें रंग लाने वाला भांग बनू। जो चढ़े क्रोध आपको मैं बालक मार्कण्डेय बनू। जो हो पिये अगर विष आप तो मैं भी बन विषहरी आपकी विष हरु। जो हो आरती आपकी उस आरती ककी डमरु बनू। जो चाहिए शांति आपको तो मैं मणिकाणिका घाट बनू। मणिकर्णिका घाट बनू


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







