Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

परिंदे खुद के लिए नयी जगह तलाशने लगे

उम्र के इस पड़ाव पर जब पिता खाँसने लगे,
ये आवाज सुन कर मेरे हाथ-पाँव काँपने लगे।

अबतक जो भाई सब देख कर भी चुपचाप थे,
मौका देख के सब अपना हिस्सा माँगने लगे।

जिनकी आवाज सुन सब खामोश हो जाते थे,
वही अब चिल्ला-चिल्ला के दौलत बाँटने लगे।

वो आँगन जिस पर खेलते-कूदते हुए थे बड़े,
हाथों में ले के फीता इंच-इंच सब नापने लगे।

ये भी सच है जब दरख़्त बूढ़ा होने लगा तो,
परिंदे खुद के लिए नयी जगह तलाशने लगे।
🖊️सुभाष कुमार यादव




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (5)

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Lekhram Yadav said

वाह कितनी खूबसूरती से आपने उन खुद गर्ज अपनों के चेहरे से नकाब उतारा, पढ़कर अच्छा लगा। बहुत खूबसूरत और भावुक कर देने वाली एक खूबसूरत रचना, आपको सादर नमस्कार।

सुभाष कुमार यादव replied

धन्यवाद यादव सर।🙏🙏

आदर्श भूषण said

वाह! अत्यंत मार्मिक और यथार्थ का सजीव चित्रण करती हुई रचना। आपने वृद्धावस्था, पारिवारिक विघटन, स्वार्थ और बदलते रिश्तों की विडंबना को अत्यंत प्रभावशाली शब्दों में उकेरा है

सुभाष कुमार यादव replied

धन्यवाद आदर्श भूषण जी।🙏🙏

रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी' said

एक एक लफ़्ज़ सत्य है यही होता है... दौलत के पीछे लोग इतने पागल है कि क्या ही बताए... समाज की एक ऐसी घटना जो अधिकांशतः परिवारों में होती है बहुत ही गिने चुने परिवार जहां सब ठीक रहता है बाकी हर परिवार में यही होता है आपने आज इस घटना को कलम में उतार दिया है.. बहुत सुंदर.. सादर प्रणाम आपको 🙏

सुभाष कुमार यादव replied

धन्यवाद सहित सादर प्रणाम रीना जी।🙏🙏

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

वाह क्या बात है 👌👌🙏 सुभाष जी खूबसूरत रचना वर्तमान में मौका परस्त लोगों की मनोदशा को आपने अपनी कविता में सुंदर सजाया है।आज हर परिवार में ये समस्या है 👌👌🙏🙏

सुभाष कुमार यादव replied

धन्यवाद समदिल सर।🙏🙏

सुप्रिया साहू said

वाह वाह.... बिल्कुल सत्य है, आजकल सब दौलत के पीछे पड़े रहते है, जो इंसान डर से कुछ बोल नहीं पाता था आज वही इंसान मां बाप के बूढ़े हो जाने पर मार पीट और जायजाद का बटवारा कर रहे हैं, दुनिया में ही रहे गुनाह पर प्रहार करती रचना, बहुत खूबसूरत रचना सर 👌👌, आपको सादर प्रणाम 🙏🙏।

सुभाष कुमार यादव replied

धन्यवाद सुप्रिया जी।🙏🙏

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