ज़मीं तप रही थी,
नीला आसमान चमक रहा था,
तो लगा गर्मी है,
पर ये प्रकृति का कर्म था,
ये उसकी इच्छा है,
जगत को बनाए रखना।
आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है,
लेकिन बस उसी दिशा में कर्म भी जरूरी है।
लगता है मुश्किल है,
पर प्रकृति में यही निरंतरता है,
कि उसका कर्म ही निरंतरता और दोहराव है,
यही उसकी सुंदरता और सत्य है।।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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