ओह मेरे प्रियतम
हृदय की गति सामान्य नहीं थी,
सांसें भी उखड़ी - उखड़ी सी होने लगी थी,
झुर्रियां पड़ गई थी चेहरे पर
आंखों की चमक भी खो गई थी।
जो नूर था मेरे चेहरे में,
तुम्हारे आने से और बढ़ गया था,
गये थे जिस दिन तुम,
तभी से ये सब कुछ फिर खो गया था।
तुम्हारे बिना खा जाएगा ये पतझड़,
ये सोच - सोच मैं बहुत घबरा रही थी।
ये भी सोच रही थी कैसे कटेगी गर्मियों की
खुले आसमान के नीचे की मेरी रातें अब,
जो कभी तुम्हारे साथ गुफ़्तगू में बीती थी।
मन में आया ये भी कि सावन की झड़ी
जो हमेशा मुझे सुकून देती थी
वही सावन की झड़ी फिर से लगेगी,
पर अब जो लगेगी
तो मुझे अंदर से पूरी तरह जला कर
राख कर देगी।
सर्दियां, जो तुम्हारे साथ बातें करते - करते
बिना आंख में एक झपकी लिए
खुशी से बीत जाती थी,
अब वही तुम्हारे बिना
तन्हा, सन्नाटे में मुझे निगलती रहेगी।
ओह मेरे प्रियतम
जो पतझड़ कभी सुकून देता था मुझे,
अब से हमेशा वो नागिन सा डॅंसेगा।
जो गर्मियों की रातें, तारे और चाॅंद - चाॅंदनी
तुम्हारे साथ प्यार करते थे मुझे,
अब तुम्हारे बिना ये भी मुझे शूल से चुभेंगे।
जो सावन मुझे झूमने गाने पर
मजबूर कर देता था,
अब वही तुम्हारे बिना
मुझे अपने साथ बरसने को कहेगा।
जो सर्दियां मुझे बड़ी भाती थी,
झिंगुरों और सियार की आवाज़ में
सर्दी में कोहरे के सन्नाटे में भी
अजीब सा सुकून था,
अब वही सर्दियां, झींगुर, सियार
और कोहरे में दबी हर आवाज़,
वो सन्नाटा मुझे ज़ंजीरों से कसेगा,
मेरे ज़िस्म को लहूलुहान
और रूह को छलनी - छलनी करेगा।
💐 रीना कुमारी प्रजापत 💐
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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