नज़र उठाकर देखिये सजाई दुकान पर।
लार बहने लग जायेगी मीठे पकवान पर।।
चाहतो को और कितना दबाओगे डर से।
करीब से तसल्ली आयेगी मेरे सामान पर।।
सिर झुका कर गुज़रते रहे मैं देखती रही।
आज भी हूँ अडिग अपने इत्मिनान पर।।
इरादा एक बहुत मजबूत पाल कर रखा।
चाहती फूल बरसाऊँ तुम्हारे सम्मान पर।।
फूल की खुशबू से वाकिफ कराऊँगी तुम्हें।
इतराओगे तुम 'उपदेश' मेरे अहसान पर।।
कुछ तो कहोगे अरे यार नजदीक आकर।
विश्वास करने लगोगे खुदा के वरदान पर।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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