✨ मेरी माँ ✨
मेरी माँ, मेरी ज़िंदगी की मिसाल है,
हर दर्द सहकर भी जो हमेशा बेमिसाल है।
जो दर्द उन्होंने चुपचाप सहा है, उम्र भर,
हर आँसू, हर खामोशी, हर तन्हाई में समा गया।
वो दर्द, वो हौसला—
आज कोई और शायद न झेल पाए।
दो बेटियों को सीने से लगाकर,
ख़ुद टूटकर भी कभी कुछ न जताए।
अपनी पूरी ज़िंदगी लगा दी उन्होंने,
हमें पालने, पढ़ाने, काबिल बनाने में।
अपने सपनों को पीछे छोड़ दिया,
हमें अपने पैरों पर खड़ा देखने के बहाने में।
सारी दुनिया से शिक़ायतें उनके पास हैं,
फिर भी हम दो बेटियाँ हैं,
उनके आँखों में बस चमकते तारे।
हमारे लिए जीती हैं, हमारे लिए सहती हैं,
अपने हर दर्द को मुस्कान में छुपा लेती हैं।
इतना प्यार कोई कैसे कर सकता है,
जो ख़ुद को पूरी तरह भूल जाती हैं।
शायद इसी लिए माँ भगवान बन जाती है,
क्योंकि वो बिना स्वार्थ प्यार निभाती है।
जो औलाद के लिए ख़ुद को भुला दे,
वही मेरी माँ, मेरी ज़िंदगी की मिसाल कहलाती है।
वही तो सच्ची माँ कहलाती है। 💖
— Gitanjali Gavel ✍️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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