बाज़ार-ए-वसीअ है ये दुनिया मेरे आगे,
मुश्तरी-ओ-फ़रोशिंदा हैं सब मेरे आगे।
मिस्ल-ए-मताअ अर्ज़ां हूँ सर-ए-बाज़ार मैं,
मुश्तरी-सिफ़त हैं अपने सब मेरे आगे।
फ़रोख़्त हुआ भी तो मयस्सर किसे कितना,
पुर-पेच-ओ-पुर-ख़म साया है मेरे आगे।
किस सम्त से आया था, किधर को रवाँ हूँ मैं,
ज़िंदगी इक राह-ए-नादीदा है मेरे आगे।
"देव" को जुस्तुजू थी इंसाँ की इस जहाँ में, मगर
ताजिर-ओ-मुश्तरी ही हैं सब मेरे आगे


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







