मत तोङो ये रिश्ते
जब राहें जुदा हो जाती हैं तब चैन कहां मिल पाएगा
जब दिल उलझे सोचों में तब चैन कहां मिल पाएगा
उस शख्स का क्या होगा जिसे भूल गया अपना कोई
गुस्से की आग में जल कर खुद भी वो जल जाएगा
अब उसकी बातों में भी पहले जैसी कोई बात नहीं
अपनापन न हो शब्दों में तब प्यार कहां से आएगा
हंसी मजाक और मीठी बोली कहीं नजर नहीं आती
कब तक बनावटी बातों से वो खुद को यूं बहलाएगा
करके दिखावा बातों में, कब तक खुद को देंगे धोखा
जब खुल के हमसे बात करेंगे चैन तभी मिल पाएगा
इन छोटी बातों से ही, ना जाने कितने दिल टूट गए
मत छोङो तुम साथ मेरा, ये साथ कहां मिल पाएगा
वो रिश्ते जुङे कहां दोबारा एक बार जो रिश्ते टूट गए
मत तोङो इन रिश्तों को कहां यादव ये सह पाएगा
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







