चौधरी बनासरी दास
(एक वंश, एक विचार, एक विरासत)
कुछ लोग
केवल अपने समय में जीते हैं,
कुछ लोग
समय से आगे निकल जाते हैं।
मेरे दादा,
चौधरी बनासरी दास
उन लोगों में थे
जिनका नाम
आज भी
गाँव की हवा में सुनाई देता है।
उन्होंने
कभी झूठ को
सहारा नहीं बनाया।
जो कहना होता,
सीधे मुँह पर कहते।
सच
चाहे कड़वा हो,
पर उनके लिए
सच से बड़ा
कोई रिश्ता नहीं था।
वे
खड़ताल स्वभाव के थे,
अन्याय के आगे
झुकना
उन्होंने सीखा ही नहीं।
उनकी आवाज़ में
डर नहीं,
केवल आत्मसम्मान बोलता था।
वे कलाकारों का सम्मान करते थे।
दूर-दूर तक
रागनियाँ सुनने चले जाते,
क्योंकि
वे जानते थे—
जिस समाज में
गीत मर जाते हैं,
वहाँ
मनुष्य भी
धीरे-धीरे मरने लगता है।
उनके पास
एक बंदूक भी थी,
पर
उससे बड़ा हथियार
उनका चरित्र था।
बिना माँ-बाप के
बचपन देखा,
अभावों की धूप में
जीवन जिया,
पर
कभी
हाथ फैलाना नहीं सीखा।
उन्होंने
माँगकर नहीं,
मेहनत करके खाया।
पसीने की कमाई को
ईश्वर का प्रसाद माना।
नशे को
उन्होंने कभी
अपने घर की चौखट
पार नहीं करने दी।
उनका विश्वास था—
जिस मनुष्य का विवेक जागता हो,
उसे
नशे की नहीं,
मेहनत की ज़रूरत होती है।
उन्होंने
अपने लिए
महल नहीं बनाए,
लेकिन
अपने बच्चों को
इतना सक्षम बना गए
कि
पूरा कुनबा
आज भी
उनकी मेहनत का ऋणी है।
यह उनकी सबसे बड़ी
जायदाद थी।
लेकिन
जीवन
सबसे मज़बूत आदमी की भी
परीक्षा लेता है।
दो जवान बेटों को
अपनी आँखों के सामने
विदा करना—
शायद
यह वही दुःख था
जिसने
पहाड़ जैसे मनुष्य को भी
अंदर से
तोड़ दिया।
उस दिन
उनकी आँखों में
पहली बार
समय हारता हुआ दिखाई दिया।
फिर भी
उन्होंने
अपनी पीड़ा को
किसी पर बोझ नहीं बनने दिया।
आज
जब गाँव में
कोई साहस की बात करता है,
कोई सच की बात करता है,
कोई स्वाभिमान की बात करता है,
तो
कहीं-न-कहीं
चौधरी बनासरी दास का नाम
अपने आप
ज़ुबान पर आ जाता है।
ऐसे लोग
मरते नहीं।
वे
अपनी संतानों के
चरित्र में,
उनकी रीढ़ में,
उनके संस्कारों में
जीते रहते हैं।
हमारी सबसे बड़ी पहचान
हमारा उपनाम नहीं,
हमारी सबसे बड़ी पहचान
यह है कि
हम
चौधरी बनासरी दास की संतान हैं।
यदि
हम
सच बोल सकें,
मेहनत से जी सकें,
किसी के आगे
अन्याय में न झुकें,
और
अपने कर्म से
अपनी पहचान बना सकें—
तो यही
उनके प्रति
हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
चौधरी बनासरी दास
को समर्पित
— सुरेन्द्र कल्याण बुटाना


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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