लम्हे गमों के अकेले बिताने पड़ते हैं
कदम एक एक कर जमाने पडते हैं
सीधे सीधे कुछ नहीं मिलता जमाने मैं
काटों में भी रास्ते बनाने पडते हैं
मिलते मिलते रह जाती हैं मंजिले
मौके कई ऐसे भी गवाने पड़ते हैं
रात दिन एक हुए किसने देखे
सबूत कामयाबी के दिखाने पडते हैं
मिली हैं मंजिलें जिनको पूछो जरा उनसे
कितने जोखिम डर डर के उठाने पड़ते हैं
ऐसे ही नहीं मिलता मुठ्ठी भर आसमां
जमीं के ऐसे कई हिस्से गबाने पड़ते हैं
किनारों पे मोती मिलते नहीं अक्सर
गहराइयों में गोते लगाने पड़ते हैं
एक खुआब मुकम्मल करने के वास्ते
शोक अपने सारे दफनानें पड़ते हैं
साक्षी लोधी


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







